सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑर्ब्जवर (न्यायिक अधिकारी) को बंधक बनाए जाने की घटना पर नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह घटना सोची-समझी और भड़काऊ लगती है। इसका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चल रही चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था ढह गई है। बेंच ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से उनकी निष्क्रियता पर जवाब मांगा। दरअसल, 7 न्यायिक अधिकारी बुधवार को मालदा के बीडीओ ऑफिस पहुंचे थे। इनमें तीन महिलाएं थीं। तभी वोटर लिस्ट में नाम कटने के विरोध में हजारों लोगों ने ऑफिस को घेर लिया। 7 अधिकारियों को रात 12 बजे तक बंधक बनाए रखा। उन्हें खाना पानी तक नहीं मिला। 9 घंटे रहे बंधक, 5 पॉइंट में जानें मामला…. 1. समय: दोपहर 2:00 बजे; न्यायिक अधिकारी मालदा के BDO ऑफिस पहुंचे एक अप्रैल को दोपहर 2 बजे के करीब 7 न्यायिक अधिकारी इलेक्शन ऑर्ब्जवर बनकर मालदा के माताबारी स्थित BDO ऑफिस पहुंचे। ये सभी अधिकारी SIR प्रोसेस से जुड़ा काम देख रहे थे। 2. समय: दोपहर 6:00 बजे; वोटर लिस्ट में नाम कटने को लेकर हजारों प्रदर्शनकारी बाहर जमा इलेक्शन ऑर्ब्जवर के ऑफिस पहुंचते की सूचना मिलते ही हजारों स्थानीय लोग बाहर जमा हो गए। उन्होंने SIR में नाम कटने को लेकर प्रदर्शन किया। 3. समय: शाम 7 बजे; प्रदर्शनकारियों की ऑफिस के अंदर जाने की मांग प्रदर्शनकारियों ने ऑफिस का घेराव कर लिया। सभी 7 न्यायिक अधिकारियों को बाहर निकलने नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि वे अधिकारियों से अपनी बात रखना चाहते हैं। जिससे इनकार कर दिया गया। 4. समय: रात 11 बजे; पुलिस सुरक्षा में अधिकारी निकाले गए, गाड़ी रोकने की कोशिश कई घंटों तक चले हंगामे के बाद प्रदर्शनकारी जब नहीं हटे तो पुलिस की मदद लेनी पड़ी। पुलिस सुरक्षा में अधिकारियों को बाहर ले जाया गया। इस दौरान भी रास्ते में बैरेकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की गई। 5. रात: 12 बजे; न्यायिक अधिकारी की गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, ईंट से हमला जिस गाड़ी से न्यायिक अधिकारियों को बाहर निकाला गया। उस गाड़ी पर प्रदर्शनकारियों ने ईंट से हमला किया। गाड़ी के शीशे तोड़ दिए गए। बंगाल में 705 न्यायिक अधिकारी अभी भी SIR का काम कर रहे पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम अभी भी जारी है। 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी हुई थी। इसमें 7.04 करोड़ वोटर के नाम थे। लगभग 60 लाख नाम न्यायिक जांच के दायरे में रखे गए। इन्हें वोटर लिस्ट में रखने या हटाने पर फैसले के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया था। चुनाव आयोग ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित करने की अधिसूचना भी जारी कर दी है। इन ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और जज करेंगे। राज्य में अब तक चार सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी हो चुकी हैं। पूरी खबर पढ़ें… ——————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल में 5% वोट बढ़े, तो बीजेपी नंबर-1 बनेगी: मुस्लिम एकजुट हुए, तो असम फिसल जाएगा अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंता बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…देश | दैनिक भास्कर
पश्चिम बंगाल में 7 इलेक्शन ऑर्ब्जवर बंधक, सुप्रीम कोर्ट नाराज:कहा- उन्हें खाना-पानी तक नहीं मिला, होम सेक्रेटरी-डीजीपी से संपर्क भी नहीं हुआ
By eye1news1
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