Sunday, February 15, 2026
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मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से की मुलाकात, हिमाचल के लिए उदार वित्तीय सहयोग का आग्रह

16 जनवरी नई दिल्ली।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणसे शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति पर विस्तृत चर्चा करते हुए हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार से उदार सहयोग देने का आग्रह किया।मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री को 16वें वित्त आयोग को प्रस्तुत किए गए ज्ञापन एवं अतिरिक्त ज्ञापन की जानकारी दी। उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान को न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष निर्धारित किए जाने की मांग की। साथ ही 16वें वित्त आयोग के अवार्ड पीरियड के दौरान राज्यों के राजस्व एवं व्यय अनुमानों का यथार्थवादी आकलन किए जाने पर बल दिया।मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों के लिए अलग से एक ‘ग्रीन फंड’ के गठन की पैरवी करते हुए इसमें प्रति वर्ष 50,000 करोड़ रुपये के प्रावधान की मांग की। उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्य देश की ‘ग्रीन फ्रंटियर्स’ हैं और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने होरिजेंटल डिवोल्यूशन के लिए राज्य की ओर से प्रस्तावित संशोधित फार्मूले की जानकारी भी दी, जिसमें वन एवं वन आधारित पारिस्थितिकी के मानदंड को विशेष महत्व देने की मांग की गई है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी उपस्थित रहे।आपदा जोखिम सूचकांक को पुनः परिभाषित करने की जरूरत पर बलमु ख्यमंत्री सुक्खू ने 15वें वित्त आयोग द्वारा विकसित आपदा जोखिम सूचकांक (DRI) को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की तुलना देश के अन्य क्षेत्रों से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद राज्य को आपदा राहत के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पाए हैं।मुख्यमंत्री ने विशिष्ट संकेतकों को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी राज्यों के लिए अलग डीआरआई तथा पृथक आवंटन की मांग की।मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राज्य को अतिरिक्त सहयोग देने का अनुरोध करते हुए कहा कि राजस्व घाटा अनुदान में पिछले कुछ वर्षों में आई भारी कमी के कारण राज्य की वित्तीय क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने राज्य को जीएसडीपी का अतिरिक्त दो प्रतिशत उधार लेने की अनुमति देने की भी मांग की।

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