उत्तर प्रदेश 21 जनवरी( दैनिक खबरनामा ) उत्तर प्रदेश गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में प्रशासनिक संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कुलपति की कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिए जाने के बावजूद सोमवार को विश्वविद्यालय में एक नया विवाद खड़ा हो गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुलसचिव पद का कार्यभार संभालने पहुंचे डॉ. विश्वास त्रिपाठी को बिना पदभार ग्रहण किए ही वापस लौटना पड़ा।सोमवार को जब डॉ. विश्वास त्रिपाठी विश्वविद्यालय पहुंचे, तो कुलसचिव कार्यालय पर ताला लटका हुआ मिला। सूत्रों के अनुसार, पदभार ग्रहण से पहले उन्होंने कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह से मुलाकात करने की कोशिश की, लेकिन कुलपति ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया। दिनभर विश्वविद्यालय परिसर में इसी मुद्दे पर चर्चाओं का दौर चलता रहा।बताया जा रहा है कि डॉ. त्रिपाठी ने पदभार न दिलाए जाने पर आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन प्रक्रिया का हवाला देते हुए उन्हें कार्यभार सौंपे बिना ही लौटा दिया गया। इस घटनाक्रम से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह द्वारा की गई उस कार्रवाई को निरस्त कर दिया था, जिसमें कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी को पद से कार्यमुक्त कर दिया गया था। इस आदेश को डॉ. त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बावजूद विश्वविद्यालय में उन्हें अब तक औपचारिक रूप से पदभार नहीं सौंपा गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जीबीयू में कुलसचिव को नहीं मिला पदभार, कार्यालय में लगा मिला ताला
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