महाराष्ट्र 20 फरवरी 2026( आई 1 न्यूज़ ) महाराष्ट्र क्या आपने गौर किया है कि फ्लाइट टिकट की कीमतें कभी अचानक घट जाती हैं और कभी चंद घंटों में बढ़ जाती हैं? यही उतार-चढ़ाव यात्रियों को अक्सर उलझन में डाल देता है। दरअसल, एयरलाइंस कंपनियां टिकटों की कीमतें तय करने के लिए एक खास रणनीति अपनाती हैं, जिसे डिमांड और सप्लाई के आधार पर संचालित किया जाता है।जब किसी फ्लाइट में सीटों की बुकिंग तेजी से होती है और मांग बढ़ जाती है, तो एयरलाइंस कीमतें बढ़ा देती हैं ताकि अधिक मुनाफा कमाया जा सके। वहीं अगर किसी तारीख पर यात्रियों की संख्या कम होती है और सीटें खाली रहने की आशंका होती है, तो कंपनियां टिकट सस्ती कर देती हैं ताकि अधिक से अधिक सीटें भरी जा सकें।यात्रा की तारीख भी कीमतों पर बड़ा असर डालती है। जैसे-जैसे उड़ान की तारीख नजदीक आती है, टिकट महंगे होते जाते हैं। खासकर छुट्टियों, त्योहारों और वीकेंड के दौरान मांग बढ़ने से किराए अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाते हैं। इसके विपरीत, सप्ताह के सामान्य दिनों में यात्रा करने पर टिकट अपेक्षाकृत सस्ते मिल सकते हैं।एयरलाइंस ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ मॉडल अपनाती हैं, जिसमें मांग, मौसम, सीटों की उपलब्धता और बुकिंग पैटर्न जैसे कई कारक शामिल होते हैं। अगर यात्री पहले से योजना बनाकर बुकिंग करें, ऑफ-सीजन में यात्रा करें और अलग-अलग वेबसाइट पर किराए की तुलना करें, तो सस्ती फ्लाइट टिकट मिलना आसान हो सकता है।
कभी सस्ती तो कभी महंगी क्यों हो जाती है फ्लाइट टिकट? जानिए एयरलाइंस की प्राइसिंग का गणित
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