चंडीगढ़ 8 मार्च 2026( आई 1 न्यूज़ ) चंडीगढ़ Punjab and Haryana High Court ने 22 साल पुराने एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी विवाद के दौरान गुस्से में “जाकर मर जाओ” जैसे शब्द कह देना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक इसके पीछे स्पष्ट मंशा और आत्महत्या से सीधा संबंध साबित न हो।जस्टिस Rupinderjit Chahal की एकल पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए वर्ष 2004 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया और किशोरी की मौत के मामले में दोषी ठहराई गई उसकी सौतेली मां को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि किशोरी की मौत वास्तव में आत्महत्या थी या उसमें सौतेली मां की कोई भूमिका थी।यह मामला हरियाणा के Mahendragarh जिले के एक गांव से जुड़ा है। किशोरी अपनी मां की मृत्यु के बाद राजस्थान में अपने ननिहाल में रह रही थी, लेकिन बाद में वह अपने पिता और सौतेली मां के साथ रहने लगी।अभियोजन के अनुसार, 6 जुलाई 2003 को किशोरी ने अपने मामा को फोन कर बताया था कि उसके पिता उसके साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं और उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। अगले दिन जब उसका मामा गांव पहुंचा तो उसे पता चला कि किशोरी की मौत हो चुकी है और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।
इसके बाद 12 जुलाई 2003 को शिकायत दर्ज कराई गई और पुलिस ने मामला दर्ज किया। ट्रायल कोर्ट ने अक्टूबर 2004 में पिता और सौतेली मां दोनों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। हालांकि अपील लंबित रहने के दौरान अगस्त 2022 में पिता की मृत्यु हो गई, जिसके बाद केवल सौतेली मां की अपील पर ही सुनवाई जारी रही।हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि मामले में किशोरी का पोस्टमार्टम तक नहीं कराया गया, जिससे मौत के कारणों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
“जाकर मर जाओ कहना आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं Punjab and Haryana High Court का अहम फैसला
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