आई 1 न्यूज़ 19 जून 2026 चंडीगढ़/मोहाली विदेश जाने के इच्छुक युवाओं और कामगारों से इमीग्रेशन मेडिकल के नाम पर हजारों रुपये वसूलने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ इमीग्रेशन कंपनियां कथित तौर पर निजी मेडिकल लैब संचालकों के साथ मिलकर ऐसे मेडिकल टेस्ट करवा रही हैं, जिनकी मान्यता और वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ितों के अनुसार, इमीग्रेशन प्रक्रिया के दौरान उनसे ₹8,000 से ₹15,000 तक की राशि ली जाती है। आरोप है कि कई मामलों में मेडिकल जांच उन संस्थानों से करवाई गई, जो संबंधित देश या प्राधिकरण के अधिकृत पैनल में शामिल नहीं थे। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि युवाओं को यह विश्वास दिलाया जाता है कि यह मेडिकल रिपोर्ट वीजा प्रक्रिया के लिए अनिवार्य और मान्य है, जबकि बाद में उन्हें दोबारा मेडिकल करवाने के लिए कहा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई देशों और खाड़ी देशों की वीजा प्रक्रियाओं में मेडिकल परीक्षण केवल अधिकृत या पैनल चिकित्सकों एवं केंद्रों से ही स्वीकार किए जाते हैं। कई मामलों में आवेदकों को ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से निर्धारित केंद्र आवंटित किए जाते हैं और रिपोर्ट सीधे अधिकृत पोर्टल पर अपलोड की जाती है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल आर्थिक शोषण का मामला है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने भी मांग की है कि इमीग्रेशन मेडिकल से जुड़ी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। साथ ही अधिकृत मेडिकल केंद्रों की सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करवाई जाए ताकि आवेदकों को किसी प्रकार की धोखाधड़ी का सामना न करना पड़े।
मेडिकल लैबोरेटरी कंपनियों के मालिकों से लगातार संपर्क करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे इस मामले पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। कुछ मेडिकल लैब कंपनियों के मालिकों का रवैया इतना टालमटोल वाला है कि जब उनसे इस मामले में जानकारी मांगी जाती है, तो वे फोन पर बात करते ही तुरंत कॉल काट देते हैं।


