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7वें वेतन आयोग की मांग पर गरजे विश्वविद्यालयों के मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी, राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

चंडीगढ़ 1 मार्च 2026 ( आई 1 न्यूज़ ) चंडीगढ़। विश्वविद्यालयों में कार्यरत मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने एक बार फिर 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग तेज कर दी है। हरियाणा मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर में तीखा आंदोलन छेड़ा जाएगा।संगठन के प्रदेशाध्यक्ष हितेंद्र सिहाग, महासचिव जगमिंदर सिंह और महिला सब कमेटी संयोजक मुकेश खरब ने संयुक्त बयान जारी कर आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर विधायकों और जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों में कई बार वृद्धि हो चुकी है, वहीं कर्मचारियों की मांगें लगातार अनदेखी की जा रही हैं। बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना कठिन होता जा रहा है।नेताओं ने कहा कि सरकार अपने ही 25 अगस्त 2014 के कैबिनेट निर्णय को लागू नहीं कर रही, जो कर्मचारियों के साथ अन्याय है। संगठन के अनुसार 2014 के चुनावी संकल्प पत्र और कैबिनेट फैसले के तहत लिपिक का मूल वेतन 35,400 रुपये, सीनियर डाटा एंट्री ऑपरेटर का 39,900 रुपये, सहायक और स्टेनोग्राफर का 44,900 रुपये, उपाधीक्षक का 47,600 रुपये तथा अधीक्षक का 56,100 रुपये निर्धारित किया जाना चाहिए।कर्मचारी संगठन लंबे समय से मूल वेतन 19,900 रुपये से बढ़ाकर 35,400 रुपये करने की मांग कर रहा है, जिसे वे 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स लेवल-6 के अनुरूप बताते हैं। सरकार द्वारा महंगाई भत्ता (डीए) में बढ़ोतरी जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन मूल वेतनमान का मुद्दा अभी भी लंबित है।संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन अपरिहार्य होगा और इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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